ब्राह्मण वैदिक संस्कृति का पोषक व संरक्षक ही नहीं संपूर्ण राष्ट्र का स्वस्ति वाचक है ।
संस्था हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक विभिन्न देशों में बसे संपूर्ण ब्राह्माण वर्ग का कल्याण बिना किसी भेदभाव से करती आ रही है।अपने सीमित संसाधनों से परिषद समय-समय पर सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार समारोह, वैवाहिक संयोजन का आयोजन, वैदिक पत्रिका का संपादन, विद्वानों का सम्मान, प्रतिभा सम्मान, श्रावणी उपाक्रम एवं ऋषि व यज्ञोपवीत पूजन समारोह का आयोजन, निश्शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन, महिला प्रकोष्ठ द्वारा अनाथ महिलाओं की सहायता आदि कार्यक्रम का संपादन करते हुए समाज को एक दिशा देने व मूलभूत संस्कारों को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रयासरत है।
ब्राह्मण सदैव ही सत्य एवं ज्ञान की रक्षा के लिए तत्पर रहें हैं - चाहे वो वैदिक मीमांसा हो, या रावण रचित गणित सूत्र या फिर चाणक्य द्वारा राष्ट्र निर्माण ...यहाँ तक कि ब्राह्मणों ने हिदुत्व के बहार निकलकर बौध , जैन , सिख और इस्लाम (हुसैनी ब्राह्मण के रूप में ) सत्य की रक्षा की हैं।
यह ब्राह्मणों का निष्कपट, निर्पंथ, निर्मल, शांत प्रिय, आत्म-संयामी, सत्य-अन्वेषी एवं ज्ञान पिपासु स्वभाव ही रहा होगा जिसने डॉ. ऑलिवर वेन्डेल होल्म्स सीनियर को अपने समाज के संभ्रांत सदस्यों के लिए "बोस्टन ब्राह्मण" जैसे शब्दों के चयन को मजबूर किया होगा।
ब्राह्मण वैदिक संस्कृति का पोषक व संरक्षक ही नहीं संपूर्ण राष्ट्र का स्वस्ति वाचक है ।

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